Today Sardar Patel is 144 birth anniversary

Today Sardar Patel is 144 birth anniversary

आज सरदार पटेल ( Sardar Patel ) की 144 जयंती

सरदार वल्लभ भाई पटेल की आज 144वीं जयंती है। पटेल को लौह पुरुष के नाम से जाना जाता है। आजादी के बाद जब वह देश के गृहमंत्री बने तो उस वक्त उन्होंने सभी छोटी और बड़ी रियासतों का भारत में विलय कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इतिहास में उन्हें इस उपलब्धि के लिए विशेष तौर पर याद किया जाता है। हालांकि सरदार पटेल निजी जीवन में भी काफी मजबूत शख्सियत थे। आज आपको उनकी जिंदगी के जुड़ा ऐसा ही किस्सा हम आपको बताने जा रहे हैं।

सरदार पटेल का जन्म

सरदार पटेल का जन्म 31 अक्टूबर को 1875 में हुआ था। पटेल गुजरात के खेड़ा जिले में पैदा हुए थे। खेड़ा में जब पटेल पैदा हुए तो शायद ही किसी को पता था कि एक दिन वह आजाद भारत को एकजुट करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

सरदार पटेल की शिक्षा

Sardar Patel ने 22 साल की उम्र में 10वीं की परीक्षा पास की। आर्थिक तंगी ऐसी थी कि स्कूली शिक्षा के बाद पढ़ न सके और किताबें लेकर घर पर ही जिलाधिकारी की परीक्षा की तैयारी में लग गए। मेहनत और लगन का परिणाम हमेशा मीठा होता है और पटेल के साथ भी ऐसा ही हुआ। उन्होंने इस परीक्षा में सर्वाधिक अंक प्राप्त किए। इसके बाद 36 साल में वह इंग्लैंड चले गए और वहां वकालत की पढ़ाई की।

सरदार पटेल के जीवन के कुछ पल

पटेल ने जिंदगी में सबकुछ मेहनत से हासिल किया था इसलिए अपने काम के प्रति उनको बेहद प्यार था। एक ऐसा वाक्या है जब वह कोर्ट में बहस कर रहे थे और तभी उन्हें उनकी पत्नी की मौत की खबर मिली। दरअसल, बात 1909 की है जब उनकी पत्नी मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती थी। इलाज के दौरान उनकी पत्नी झावेर बा का निधन हो गया। एक व्यक्ति ने कोर्ट में बहस कर रहे पटेल को पर्ची पर लिखकर यह दुखद खबर दी। उन्होंने उसे पढ़ा और पर्ची जेब में रखते हुए बहस जारी रखी। वह केस जीत गए और फिर सबको बताया कि उनकी पत्नी का निधन हो गया है।

इतिहास में सरदार पटेल का योगदान

जिस वक्त देश आजाद हुआ उस वक्त देश में कुल 562 रियासतें थीं। इनका भारत में विलय करवाना एक बड़ा काम था। Sardar Patel ने अपनी सूझबूझ से यह काम बड़े शानदार तरीके से किया। दरअसल, उस वक्त मुख्य तौर पर केवल जूनागढ़, हैदराबाद और कश्मीर रियासतें ही ऐसी थीं जो भारत में विलय के पक्ष में नहीं थी। सरदार पटेल भी लौह पुरुष थे और उन्होंने विद्रोह के लिए तैयार जूनागढ़ और हैदराबाद के निजाम को भारत के साथ विलय करने के लिए तैयार कर लिया।

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