सिनेमा घरों में कोई खास कमाल नहीं दिखा पाई 2.0।

जिस तरह दर्शक बेसब्री से रजनीकांत और अक्षय कुमार की फ़िल्म 2.0 का इंतज़ार कर रहे थे। उस लहज़े से यह फ़िल्म उतना कमाल नहीं कर पाई ,मगर हाँ रजनीकांत और अक्षय कुमार के वो फैन जो उनकी एक झलक पाने के लिए बहुत कुछ  कर सकते हैं इस फ़िल्म को देखने जरूर जाएंगे। टेक्नोलॉजी के आधार से यह फ़िल्म खास वर्ग के दर्शकों को पसन्द आ सकती है। फ़िल्म का कॉन्सेप्ट अलग हटकर है लेकिन कहीं- कहीं दर्शकों पर अपनी पकड़ छोड़ रहा है। अगर इसकी कहानी की बात करें तो वो इस प्रकार है कि अचानक चेन्नई शहर में लोगों के हाथों से मोबाइल उड़ जाने की घटनाएं घटने लगती हैं। डरे हुए लोग पुलिस के पास जाते हैं।बात साइंटिस्ट वशीकरण बने रजनीकांत तक पहुंचती है। इस समस्या से निपटने के लिए वशीकरण चिट्टी को वापिस बुलाते हैं। बाद में उन्हें पता चलता है कि इन तमाम घटनाओं के पीछे साइंटिस्ट पक्षीराजन बने अक्षय कुमार की आत्मा का हाथ है ,जो  मरने से पहले सरकार को इस बात की जानकारी देना चाहते हैं कि मोबाइल की रेडिएशन की वजह से ही पक्षियों की जान जा रही है लेकिन उनकी इस बात पर कोई यकीन नहीं करता और वह मोबाइल टॉवर से कूदकर अपनी जान दे देते हैं और उसके बाद से ही उनकी आत्मा मोबाइल का इस्तेमाल करने वालों के पीछे हाथ धोकर पड़ जाती है। इसी उधेड़बुन में कहानी आगे खिसकती है। इस बात में कोई शक नहीं कि फ़िल्म डायरेक्टर शंकर एस. स्क्रिप्ट लिखते समय कुछ आवश्यक बिंदुओं को नज़र अंदाज़ कर गए जिसका असर इस फ़िल्म पर पड़ता नज़र आया है। फ़िल्म के पहले भाग में रजनीकांत तो चिट्टी को वापिस बुलाने की कोशिश में लगे रहते हैं और अक्षय कुमार कहीं दिखाई ही नहीं देते। हीरोइन एमी जैक्सन महज़ एक रोबोट ही बनकर रह गई जिनका कोई खास रोल पूरी फिल्म में नज़र नहीं आया। ऐश्वर्या राय की झलक बस सेलफोन पर ही देखने को मिली। फ़िल्म का दूसरा भाग दिलचस्प है जब अक्षय कुमार की एंट्री होती है उसके बाद दो रोबोट के बीच की लड़ाई दर्शकों को काफी पसन्द आ सकती है। इसके साथ ही इस फ़िल्म में 2.0 के साथ -साथ 3.0 का वर्जन भी एक जबरदस्त ट्विस्ट लेकर आया। संगीत की दृष्टि से देखें तो एक भी गाना ना तो संगीत प्रेमियों के दिल को छू पाया और ना ही उनकी जुबान पर चढ़ पाया। हां , एक्शन सीन, ग्राफ़िक्स तथा  वीएफएक्स का शानदार प्रयोग किया गया है लेकिन फिर भी यदि इस फ़िल्म की तुलना हम किसी हॉलीवुड की फ़िल्म से करें तो यह बहुत पीछे नज़र आएगी। इन सभी बातों को देखते हुए हम इस फ़िल्म को देते हैं 5 में से 3 स्टार(⅗)

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