आखिर मिला अपना घर

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3 साल पहले बेटे-बहु द्वारा निकाले गए बुजुर्ग दम्पति को कानून की मदद से आखिर अपना घर मिल ही गया| बोरीवली में रहने वाले और चाय की छोटी सी दुकान चलने वाले बृजेश सोनी को क्या पता था की बेटे प्रदीप की शादी के बाद उनके ऊपर मुसीबतो का पहाड़ टूट पड़ेगा घर से बेघर होकर फुटपाथ पर दिन गुजरने पड़ेंगे और राहगीरों की मदद से गुजर बसर करनी पड़ेगी|

71 साल के ब्रजेश सोनी, 69 वर्षीया अपनी पत्नी चमेली देवी के साथ बोरीवली ईस्‍ट में कार्टर रोड पर भगवानदीन कुर्मी चाल में बेटी सीमा के साथ रहते थे| उन्होंने बतया की पहले उनका बेटा प्रदीप उनका बहुत ख्याल रखता था पर शादी के बाद उसने पहले बिजली का बिल अपने नाम करवाया और चाय की दुकान की कमाई भी सारी छीन लेता था मना करने पर मार कुटाई पर उतर आता था और अक्सर घसीट कर सड़क पर फैक देता था ऐसे करते करते प्रदीप ने उनको घर से निकाल दिया था|

अस्थायी तोर पर कभी कभी रिश्तेदारों के यहाँ दिन गुजरे वो कभी फुटपाथ पर,कभी रेलवे स्टेशन पर, कभी शिव मंदिर में रहते रहे|

तीन वर्ष तक तमाम सरकारी दफ्तरों में इंसाफ की गुहार लगाई पुलिस ने भी काफी समय तक मामला लटकाए रखा फिर किसी ने मेंटिनेंस ऐंड वेलफेयर ऑफ पैरंट्स ऐंड सीनियर सिटीजंस ऐक्‍ट 2007 में इनको भेजा जहा से इनको न्‍याय मिला| 11 जून समाज कल्याण मंत्री ने राजकुमार बड़ोले ने इनकी अर्जी सुनते हुए एसडीओ को आदेश दिए और तुरंत अमल करने को कहा| जहां से अगस्‍त 2016 में उन्‍हें धक्‍के मारकर निकाल दिया गया था बीती 18 जून को इस बुजुर्ग दंपती को बोरीवली का अपना मकान फिर से मिल गया | बहु बेटे ने काम में अड़चन डालने की कोशिश की तो पुलिस ने उनको गिरफ्तार कर 1 जुलाई तक कस्तूरबा पुलिस स्टेशन में भेज दिया और उन पर सरकारी कर्मचारी के साथ मारपीट करने, सरकारी काम में बाधा डालने समेत आईपीसी की कई धाराओं में केस दर्ज कर दिया|

चमेली देवी ने दुखी हिर्दय से कहा की हमे इससे कुछ मदद नहीं चाहिए बस ये हमारी नजरो से दूर रहे|

अगर सरकारी स्तर पर जागरूकता अभियान चलाये जाये तो हर बुजुर्ग को न्याय मिल सकता है ऐसे बुजुर्गो को दफ्तरों में धक्के खाने की जरुरत होगी |

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