USA के हॉवर्ड विश्वविद्यालय में व्याख्यान देगी राजस्थानी महिला- रूमा देवी

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Ruma Devi

देश के सबसे बड़े प्रदेश राजस्थान के सीमावर्ती बाड़मेर जिले की देहाती औरत रूमा देवी अमेरिका की हॉवर्ड यूनिवर्सिटी में लेक्चर देंगी। राजस्थान के थार की हस्तशिल्प को दुनियाभर में पहचान दिलाने वाली रूमा देवी हॉवर्ड यूनिवर्सिटी में महिला सशक्तीकरण और हस्तशिल्प को लेकर लेक्चर देंगी। अगले वर्ष 15 और 16 फरवरी को आयोजित हॉवर्ड यूनिवर्सिटी में आयोजित होने वाली कांफ्रेंस में रूमा देवी के अतिरिक्त विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित वक्ता शामिल होंगे।

एक देहाती राजस्थानी महिला रूमा देवी करीब एक हजार शिक्षाविदों, छात्रों और युवा उद्यमियों से मुखातिब होंगी। यह कांफ्रेंस भारत से जुड़े समकालीन विषयों पर संवाद, परिचर्चा और लोगों को जोड़ने के दुनिया के सबसे बड़ों मंचों में से एक है। इसमें दुनिया भर की हस्तियां भी हिस्सा लेती हैं। रूमा देवी ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिहाज से हस्तशिल्प कला से उन्हें जोड़ा है।

अब तक जो अचीव किया

इसके लिए उन्हें अब तक 25 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। इनमें भारत का प्रतिष्ठित नारी शक्ति पुरस्कार, कर्मवीर-2019 सम्मान, बजाज जानकी पुरस्कार, फेसबुक द्वारा एसईआर सम्मान, वुमन ऑन विंग्स नीदरलैंड सम्मान, इंकपोट एचिवर्स अवार्ड, लाड़ो पुरस्कार,हुनरमंद अवार्ड,महिला शिरोमणी सम्मान,द सवाई जयपुर अवार्ड एवं डिजाइनर ऑफ इयर अवार्ड सम्मान शामिल है। रूमा देवी ने बताया कि अमेरिका मे इंडिया कॉन्फ्रेंस महिला सशक्तिकरण व हस्तशिल्प क्षेत्र में इनके द्वारा अपनाए जा रहे नवाचारों और प्रयासों को दुनिया भर के लोगों से साझा करने का उत्कृष्ट मंच उपलब्ध कराएगा।

Ruma Devi

रूमा देवी का जीवन और संघर्ष

साल 1988 में बाड़मेर के गांव रावतसर में खेताराम व इमरती देवी के घर जन्मीं रूमा देवी 7 बहन व एक भाई में सबसे बड़ी हैं। महज पांच साल की उम्र में मां इमरती देवी की मौत के बाद पिता ने दूसरी शादी कर ली। रूमा देवी अपने चाचा के पास रहकर पली-बढ़ी। गांव के सरकारी स्कूल से आठवीं तक ​की शिक्षा पाई। उस समय गांव में दस किलोमीटर दूर से बैलगाड़ी पर पानी भरकर भी लाना पड़ता था।17 साल की उम्र में बाड़मेर जिले के गांव मंगला बेरी निवासी टिकूराम के साथ रूमा की शादी हुई। इनके एक बेटा है लक्षित ने जन्म हुआ |

रूमा देवी की जिंदगी में वर्ष 2006 में उस वक्त नया मोड़ आया जब ये ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान बाड़मेर (जीवीसीएस) नाम के एनजीओ से जुड़ी। यह एनजीओ समूह बनाकर राजस्थानी हस्तशिल्प जैसे साड़ी, बेडशीट, कुर्ता समेत अन्य कपड़े तैयार करता है। रूमा देवी के कौशल, काम को लेकर लगन और मेहनत के चलते इस एनजीओ से 22 हजार महिलाएं जुड़कर रोजगार पा रही हैं। वर्तमान में रूमा देवी ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान बाड़मेर की अध्यक्ष हैं |

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