दर्शकों की उम्मीदों पर पूरी तरह खरी उतरी है ‘उरी, द सर्जिकल स्ट्राइक’, देशभक्ति से लबरेज़ रही फ़िल्म।

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निवेदित निर्देशक आदित्य धर की फ़िल्म ‘उरी, द सर्जिकल स्ट्राइक’ बेहद दमदार फ़िल्म है। बहुत दिनों बाद देशभक्ति पर आधारित एक बेहतरीन फ़िल्म देखने को मिली है। इस फ़िल्म में सभी कलाकारों ने चाहे वो विक्की कौशल हों, यामी गौतम हों, परेश रावल हों, रजत गुप्ता हों, कीर्ति कुल्हारी हों या मोहित रैना अथवा स्वरूप संपत सबने अपना शत्- प्रतिशत दिया है। इस फ़िल्म की खूबी यह है कि पूरी फिल्म एक सच्ची घटना पर आधारित है। इस फ़िल्म को देखकर भारतीय जवानों के प्रति सिर श्रद्धा से झुक जाता है।

विक्की कौशल की अगर हम बात करें तो उन्होंने आर्मी ऑफिसर विहान की बहुत ही जबरदस्त भूमिका निभाई है। परेश रावल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के रूप में नज़र आए हैं तथा रजत गुप्ता ने प्रधानमंत्री मोदी जी की भूमिका निभाई है। यह फ़िल्म भारत के पाकिस्तान को दिए जवाबी हमले के रूप में 28 सितम्बर 2016 को की गई सर्जिकल स्ट्राइक पर आधारित है। यह सर्जिकल स्ट्राइक 18 सितम्बर,2016 को पाकिस्तान द्वारा किए गए उरी हमले में मारे गए भारतीय सेना के 19 जवानों की मौत का बदला लेने के लिए की गई थी। फ़िल्म की पटकथा के साथ -साथ इसके डायलॉग भी बहुत ही दमदार हैं जो दर्शकों के दिल पर छाप छोड़ जाते हैं। फ़िल्म में कुल मिलाकर तीन गाने हैं औऱ तीनों ही अपना असर छोड़ने में कामयाब रहे हैं। एक्शन, थ्रिलर, और रोमांच से भरपूर यह फ़िल्म कहीं भी अपनी पकड़ नहीं छोड़ती।

फ़िल्म की कहानी कुछ इस प्रकार है- मेजर विहान शेरगिल यानी विक्की कौशल तथा कैप्टन करण कश्यप यानी मोहित रैना मणिपुर कैम्प पर हुए आतंकवादियों के हमले का मुहँ तोड़ जवाब देते हैं। विहान की माँ यानी स्वरूप सम्पत को अल्ज़ाइमर्स है इसलिए अपनी मां का ख्याल रखने के लिए विहान अपनी पोस्टिंग दिल्ली सूचना केंद्र में करवा लेता है। उन्हीं दिनों उरी पर फिदायीन आतंकी हमला होता जा जिसमें 19 भारतीय जवान शहीद हो जाते हैं।इस हमले से पूरे देश में और सेना में रोष को लहर दौड़ उठती है और सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल यानी परेश रावल प्रधानमंत्री से इस हमले का जवाब देने की अनुमति मांगते हैं।बहुत जदोजहद के बाद उन्हें प्रधानमंत्री से मंजूरी मिलती है औऱ फिर शुरू होती है सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी। इस मिशन कर लिए विहान शेरगिल आगे आते हैं जो पाकिस्तान को तो मुहंतोड़ जवाब देना ही चाहते हैं साथ ही करण कश्यप की मौत का बदला लेना भी चाहते हैं। बड़ी मुश्किल से उन्हें इस मिशन पर जाने की अनुमति मिलती है और वे अपने सीनियर से वादा करते हैं कि वे अपनी टीम के सभी सदस्यों को सही सलामत वापिस लाएँगे। इंटलीजेंस ऑफिसर बनी यामी गौतम और एक शहीद की विधवा और फाइटर पायलट बनी कीर्ति कुल्हारी इस मिशन में उसका साथ देती हैं। इस तरह भरपूर एक्शन के साथ फ़िल्म अपने मुकाम तक पहुंचती है। अगर देखा जाए तो इस फ़िल्म में सब कुछ है ड्रामा, एक्शन, इमोशन्स हैं और थ्रिल है
अगर कमी है तो बस थोड़े सस्पेंस की। आदित्य धर ने दर्शकों की नब्ज को बखूबी पकड़ा है। राजनीतिक माहौल के चलते हुए भी ये फ़िल्म राजनीति पर कम और  देशभक्ति पर ही आधारित लगती है जो इस फ़िल्म का बहुत बड़ा सकारात्मक पक्ष है।

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